समय (time) बहुत ही कीमती चीज है। जिसने इसके मूल्य को समझ लिया उसको किसी भी कार्य में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।
प्राची में सूर्यादय हुआ और पश्चिम में अस्त हो गया। लो एक दिन समाप्त हो गया। आपकी आयु एक दिन कम हो गया। समय अपने गति से चल रहा है। चल ही नहीं भाग रहा है। निरन्तर गतिमान इस समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने पर ही मानव जीवन की सार्थकता है। इस के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलने वाला व्यक्ति बिछड़ जाता है। पिछड़ना — सफलता से दूर हटाना है, उसकी ओर गतिशील होना नहीं।

सुनते है “मनुष्य की साँसें गिनी हुई हैं। एक श्वास के साथ जीवन की इस अमूल्य निधि की एक इकाई कम हो गई। एक-एक इकाइयाँ कम होती जाए तो जीवन की पूँजी एक दिन चूक जाती है। उस समय मृत्यु दूत बनकर लेने आ जाते है। उसके साथ जाते-जाते व्यक्ति पीछे मुड़कर देखता है तो उसे ज्ञात हो जाता है कि उसने कितनी बेदर्दी से समय को गँवाया है या उसके एक-एक क्षण का सदुपयोग किया है।
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सम्पदा का — विद्या का रोना सभी को रोते देखा है। कोई धन के अभाव में दुखी है तो किसी के पास ज्ञान नहीं — विद्या नहीं। उसके लिए सिर पीट रहा है। समझ में नहीं आता कि ऐसे लोग कब अपने सामर्थ्य को समझेंगे।
अपनी इस प्राकृतिक धरोहर का अधिकांश मनुष्य समुचित सदुपयोग नहीं करते। बचपन में इतना ज्ञान नहीं होता कि इसका मूल्य समझें। खेल-कूद तथा मित्रों व भाई-बहनों के झुंड के साथ यों ही इस सम्पदा को लुटाते चलते है। एक दिन यौवन आ खड़ा होता है। यह यौवन समय के बहुमूल्य वरदान के रूप में मिलता है। यह वह सामर्थ्य होती है जिसे यदि अधिक समय तक स्थायी बनाया जा सके तन से मन से बूढ़े न हो जाँय तो गिनी हुई साँसों के इस जीवन में बहुत काम कर सकते हैं।
जिस व्यक्ति में समय को उचित पूर्वक खर्च करने की तथा उसका सदुपयोग करने की सामर्थ्य नहीं होती है तो समय उसे खर्च कर देता है। दिन-रात के चौबीस घंटे कम नहीं होते। इस समय (time) को हम किस प्रकार व्यतीत करते है इसका लेखा-जोखा करते चलें तो हमें ज्ञात हो जाता है कि हम जी रहे हैं या समय को व्यर्थ गँवा कर एक प्रकार की आत्महत्या कर रहे हैं।
जिन व्यक्तियों ने इसके मूल्य को समझा। अपने जीवन के एक-एक क्षण का सदुपयोग किया उनकी गणना महामानवों में हुई। किसी दार्शनिक ने ठीक ही कहा है — “मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी समय है यदि उसे खर्च करना सिख लिया जाय तो उससे बहुमूल्य सफलता भी खरीदी जा सकती है। “
जिन्हें इस मूल्यवान समय का मूल्य ज्ञात नहीं होता उनके लिए समय काटना भारी होता है। इस दुर्भाग्य को क्या कहा जाय ? पैसों का भंडार भरा है और खर्चने वाला जानता नहीं कि इसका क्या उपयोग है। वह राह चलते व्यक्ति से पूछता है ‘भाई इसे किस तरह लुटाया जाय ?” ऐसी विडम्बना में फंसे हुए व्यक्ति ताश खेलने में घंटों गुजार देते हैं। शतरंज, चौपड़ आदि न जाने कितने ऐसे साधन हैं जिन्हें लोग समय (time) काटने का साधन मानते है।
आजकल तो टी.वी और मोबाइल जैसे साधन अच्छा जरिया बन गया अपना समय काटने का। आजकल के अधिकतर युवा-पीढी बस मोबाइल में गेम खलने में, वीडियो देखने में इत्यादि जैसे फालतू कामों में दिन-भर लगे रहते है और अपना कीमती समय बर्बाद करते है।
प्रकृति ने किसी को गरीब अमीर नहीं बनाया।
दिन भर के चौबीस घंटों में किस समय से किस समय तक क्या काम होंगे इस प्रकार की समयसारिणी (time table) बनाकर उस पर चलने से समय का सदुपयोग तो होता ही है काम भी अधिक होता है तथा जीवन में सरसता बनी रहती है। जो उसका विभाजन नहीं करते वे दिन भर कोल्हू के बैल की तरह लगे भले ही रहें काम कम ही कर पाते है तथा अधिक समय (time) तक एक ही काम करने से थकान तथा मानसिक अरुचि उत्पन्न हो जाती है। जीवन का यह ढर्रा थोड़े ही दिनों में व्यक्ति को निराश बना देता है।
काम जिस प्रकार आवश्यक है उसी प्रकार विश्राम भी आवश्यक होता है। प्रकृति ने भी दिन जागने — काम करने के लिए बनाया है। समय का विभाजन हो जाने से काम (time) करने तथा विश्राम करने में सामंजस्य बना रहता है। समय का विभाजन न किया जाय तो कभी काम अधिक व कभी नींद अधिक हो जाने से शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। इसका कुपरिणाम असमय वृद्ध हो जाना तथा असमय मृत्यु के पाश में बँध जाना ही होता है।
समय गतिशील है। हाथ से निकला हुआ आज, बीत हुआ कल हो जाता है। मनुष्य का जीवनकाल ईश्वर ने निर्धारित करके उसे बता नहीं दिया। जाने किस दिन बुलावा आ जाय। इसलिए समझदार व्यक्तियों ने यह सुझाव दिया है कि आज का काम कल पर नहीं रखना चाहिए वरन् प्रयास यह करना चाहिए कि कल किया जाने वाला काम भी आज ही पूरा कर लेना चाहिए, हो सकता है कल जिये या न जिये।
“जो लोग समय का सदुपयोग करते हैं उनके पास समय अधिक देर रुकता है।” लियोनार्दो विची के इस रहस्य भरे कथा की गहराई में जाँय तो इसकी सत्यता स्पष्ट होती जाती है।
समय का सदुपयोग करने की कला को जिसने जान लिया वह अन्य व्यक्तियों से तीन चार गुना काम करते हुए भी घूमने, विश्राम करने, परिवार के सदस्यों, मित्रों व परिजनों से मिलने, जुलने, हँसने — वार्तालाप करने का समय निकाल लेता है। जबकि अन्य व्यक्तियों के पास इन सबके लिये समय नहीं रहता। यह कला प्रत्येक व्यक्ति में अपने आप विकसित होती है। प्रत्येक व्यक्ति अपने ढंग से इसका विकास कर सकता है।
मुझे समय (time) का मूल्य कब समझ में आया ?
मैंने एक साल का कीमती समय यूँ ही बर्बाद कर दिया। मैं चाहता तो इन एक साल में अपना competitive exam निकाल सकता था। परंतु मैंने इन 1 साल में परीक्षा की तैयारी ठीक ढंग से की ही नहीं। एक साल कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला।
समय कितना मूल्यवान होता है इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मेरा एक दोस्त ने परीक्षा निकाल लिया और मैं असफल हो गया। उस दिन मैं समझ गया यह जो समय है वह अपने रफ्तार से आगे बढ़ रही है परंतु मैं अभी तक वहीं का वहीं रुक हुआ हूँ अतीत और भविष्य की बातों में।
इसके बाद से मैंने ठान लिया कि मैं समय के किसी भी क्षण को फालतू कामों में बर्बाद नहीं करूँगा और लग गया समय के रफ्तार से भी आगे बढ़ने के लिए।
समय (time) बहुत ही मूल्यवान है। यह किसी का इंतजार नहीं करती है बल्कि अपने रफ्तार से आगे बढ़ती जाती है। आशा करता हूँ कि आप लोग अपने कीमती समय को फालतू कार्यों में बर्बाद नहीं करेंगे।
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